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Thursday, March 11, 2010

कर्म

----- Original Message ----- To: mggarga@gmail.com
Sent: Thursday, March 11, 2010 5:32 AM
Subject: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL-Good thoughts by SUDHANSHUJI Maharaj] कर्म


कर्म और भाग्य दोनो अलग अलग हें और इनका महत्त्व ही ! कर्मठता पर ध्यान दो और आलस्य को त्यागो ! भाग्यवादी मत् बनो परिश्रम करो !
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

Sunday, January 10, 2010

तर्क और प्यार

तर्क और प्यार


तर्क कर लेना भली बात हें पर उसको तकरार में मत् बदल लेना !
जितना त्याग होगा उतना प्यार गहरा होगा ,त्यागी बनो प्यार अपने आप होजाएगा
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश

Thursday, January 7, 2010

नव वर्ष की शुभ काम्नाएं

नव वर्ष की शुभ काम्नाएं


सु:ख समृद्धि से भरपूर
हर घर आंगन हो !
जीवन में नित नूतन खुशियां आएँ ,
हर दिन ,हर पल मन भावन हो !
फैले यश कीर्ति दिग्दगान्त,
तन मन धन अति पावन हो !
बढे प्रेम श्रद्धा सिमरन नित ,
हरि कृपा का बरसता सावन हो !
नव वर्ष की आप सबको ,
हार्दिक मंगल कामनाएं !

-आचार्य सुधांशु
जीवन संचेतना जनवरी 2010

गृहस्थ आश्रम के ३१ वर्ष सम्पन्न होने पर बधाई

गृहस्थ आश्रम के ३१ वर्ष सम्पन्न होने पर बधाई



परम श्रद्धेय सदगुरुदेव जी एवं परम पूज्या गुरुमाता जी को

गुरुभाक्तों के ओर से बधाई !

परम श्रद्धेय सदगुरु श्रीसुधांशुजी महाराज एवं परम आदरणीया

गुरुमाता श्रीमती ऋचासुधांशुजी के गृहस्थ आश्रम के ३१ वर्ष सम्पन्न

होने पर समस्त भक्तजनों की गुरुचरणों मैं हार्दिक शुभकामनाएं !

शत शत नमन एवं अभिनन्दन

१४ जनवरी मकर संक्रान्ति उतरायण का पावन पर्व गुरुदेव -गुरुमां

के ग्रहस्थ प्रवेश की मंगलमयी मधुर समृति है ! सभी भक्तजनों को

इस मंगल पर्व की लाख-लाख बधाई !
जीवन संचेतना जनवरी २०१०

Thursday, October 15, 2009

बोध कथाएँ

बोध कथाएँ


बोध कथाएँ
परमपूज्यश्री सुधांशुजी महाराज


प्रथम संस्करण : श्रद्धा पर्व २००९

प्रतियाँ :११००

मूल्य :६0 रुपये

सम्पादन :डा:नरेंद्र मदान


Thursday, September 24, 2009

भावनायें




सृष्टि का आधार है गृहस्त आश्रम और सुखी गृहस्त का आधार है प्रेम एवं सहानुभुति ! घर परिवार में मनुष्य को प्रेम -सहानुभूती चाहिए !भावनायें संबंधों को मजबूत करने में बहुत काम आती हैं , बच्चे के जीवन में माँ बाप के वात्सल्य के बिना बहुत कुछ अविकसित रह जाता है !जहां प्रेम है वहां समर्पण भी है !शादी के समय वर कन्या एक दुसरे को हार पहनाते हैं , अगर उस हार के अन्दर का धागा टूट जाए तो फूल बिखर जाते हैं ! जैसे वह हार नहीं रहता ऐसे ही गृहस्त जीवन प्रेम के धागे से बंधा रहता है और प्रेम टूट गया तो परिवार बिखर गया !घर परिवार में प्रेम नहीं तो व्यक्ति कितना ज्ञानी ,कितना ध्यानी और कितना ही बली और बहादुर क्यों न हो मिट जायेगा !