GURUVANNI Good Thoughts by Pujay SUDHANSHUJI Maharaj: Fw: [DELHI (VISHWAJAGRITI MISSION )] शान्ति एव सौह...: " ----- Original Message ----- From: Madan Gopal Garga To: mggarga@gmail.com Sent: Wednesday, October 13, 2010 7:17 PM Subject: [DELHI (..."
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश
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Thursday, October 14, 2010
Thursday, September 16, 2010
Media khabar dikhaye na ki khabar banaye" -Aachar...
GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL-Good thoughts by SUDHANSHUJI Maharaj: "Media khabar dikhaye na ki khabar banaye" -Aachar...: "गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश"
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश
Sent: Wednesday, September 15, 2010 10:24 PM
Subject: [Bhilai Mandal (Vishwa Jagriti Mission)] हरी ॐ

करले भला, होगा भला,
बस यही है संसार में जीने की कला।
--
Posted By Rashmi to Bhilai Mandal (Vishwa Jagriti Mission) at 9/15/2010 10:22:00 PM
भाग्य क्या है
----- Original Message -----
From: vjm na
Sent: Thursday, September 16, 2010 7:38 AM
Subject: अमृत वचन
भाग्य क्या है ? अवसर और तत्परता, दोनों का मिलन ही भाग्य है। जो अवसर को पह्चान ले और तत्परता से पकड़ ले, बस समझ लीजिए भाग्य हाथ में आ गया। अवसर को ढूढिए, अवसर को पहचानिए और तत्परता से फ़ायदा उठI लीजिए, नहीं तो वो लौट के आने वाला नहीं है।
परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज
What is destiny ? The combination of opportunity and eagerness is destiny. Those who can identify an opportunity and take advantage of it with eagerness, can reach their full potential and their destiny. Search for opportunities, recognize them and take advantage of them with eagerness because once an opportunity is gone it will not come back.
Translated by Humble Devotee
Praveen Verma
Thursday, September 2, 2010
बेटी के सुखी जीवन के लिए
बेटी के सुखी जीवन के लिए
* ससुराल पक्ष के लोग और उसके पति को उनकी आदतें,
स्वभाव , रुचियाँ समझने और उनके साथ तालमैल मिलाने का अवसर है !
* हर बात में बेटी का पक्ष न लें ! उसे त्याग ,समर्पण ,सहयोग ,
एवं प्रत्येक के साथ मधुर व्यवहार की शिक्षा दें !
* ससुराल वाले बहू को बेटी मानें यह बहुत अच्छा हे लेकिन
बहू ससुराल में स्वंय को बेटी मानने की भूल कभी न करे !
*क्योकि बेटी अपने माता पिता के घर में माता-पिता और भाइ -बहन इत्यादि से अपेक्षा और अपने कार्य के प्रति उपेक्षा रखे तो चलता है लकिन ससुराल में यही अपेक्षा और उपेक्षा भारी कष्ट का
कारण बनती है !
* अगर किसी से कोई कठोर बात कहने की आवश्यकता पडे यो उसे मधुर शब्दों में ही कहना चाहिए !
* पति के घर में सबकुछ पिता के घर जैसा कभी नही होता !
इसलिए बेटी को ससुराल में ससुराल की परिस्थितियां ,वहां क्र अभाव -प्रभाव ,लोकरीति,व्यवहार ,रीति तथा कुल परम्पराओं के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा दें !
*अगर कोई अच्छी बात अच्छी आदत को बेटी वहां के लोगों में
डालना चाहती हे तो बडी सावधानी ,धैर्य एवं धीरे धीरे और उसका स्वयं आचरण करके प्रारंभ करे अन्यथा वहां के लोगो का अहंइसे सहन नहीं कर पायेगा!
*पति को उसके माता पिता ,भाई बहन के प्रति दायित्वों से विमुख करने का प्रयास कभी न करें इससे मनों में कटुता आती है !
*स्त्री पर तीन कुलों के निर्माण का दायित्व होता है उसे इस गरिमा को कभी नहीं भूलना चाहिए !
*इस महान कार्य की पूर्ति वह प्रेम ,सहनशीलता सदव्यवहार ,सदाचरण एवं त्यागपूर्ण जीवन से ही कर सकती हैं !
धर्मदूत जुलाइ 2010 से !
* ससुराल पक्ष के लोग और उसके पति को उनकी आदतें,
स्वभाव , रुचियाँ समझने और उनके साथ तालमैल मिलाने का अवसर है !
* हर बात में बेटी का पक्ष न लें ! उसे त्याग ,समर्पण ,सहयोग ,
एवं प्रत्येक के साथ मधुर व्यवहार की शिक्षा दें !
* ससुराल वाले बहू को बेटी मानें यह बहुत अच्छा हे लेकिन
बहू ससुराल में स्वंय को बेटी मानने की भूल कभी न करे !
*क्योकि बेटी अपने माता पिता के घर में माता-पिता और भाइ -बहन इत्यादि से अपेक्षा और अपने कार्य के प्रति उपेक्षा रखे तो चलता है लकिन ससुराल में यही अपेक्षा और उपेक्षा भारी कष्ट का
कारण बनती है !
* अगर किसी से कोई कठोर बात कहने की आवश्यकता पडे यो उसे मधुर शब्दों में ही कहना चाहिए !
* पति के घर में सबकुछ पिता के घर जैसा कभी नही होता !
इसलिए बेटी को ससुराल में ससुराल की परिस्थितियां ,वहां क्र अभाव -प्रभाव ,लोकरीति,व्यवहार ,रीति तथा कुल परम्पराओं के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा दें !
*अगर कोई अच्छी बात अच्छी आदत को बेटी वहां के लोगों में
डालना चाहती हे तो बडी सावधानी ,धैर्य एवं धीरे धीरे और उसका स्वयं आचरण करके प्रारंभ करे अन्यथा वहां के लोगो का अहंइसे सहन नहीं कर पायेगा!
*पति को उसके माता पिता ,भाई बहन के प्रति दायित्वों से विमुख करने का प्रयास कभी न करें इससे मनों में कटुता आती है !
*स्त्री पर तीन कुलों के निर्माण का दायित्व होता है उसे इस गरिमा को कभी नहीं भूलना चाहिए !
*इस महान कार्य की पूर्ति वह प्रेम ,सहनशीलता सदव्यवहार ,सदाचरण एवं त्यागपूर्ण जीवन से ही कर सकती हैं !
धर्मदूत जुलाइ 2010 से !
Saturday, June 26, 2010
हर भक्त की पुकार
----- Original Message -----
From: Niranjan Manju Agarwal
Sent: Monday, June 21, 2010 8:22 AM
Subject: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL-Good thoughts by SUDHANSHUJI Maharaj] 6/21/2010 0...
हर भक्त की पुकार अपने सद्गुरुजी के लिए एक ही होती है और वह है।
तेरा जलवा जहाँ होगा।
मेरा सजदा वह होगा।
मेरे जैसे तो लाखो होंगे।
पर तेरे जैसा प्यारा कहाँ होगा।
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश --
Niranjan Manju Agarwal द्वारा GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL-Good thoughts by SUDHANSHUJI Maharaj के लिए 6/21/2010 08:15:00 AM को पोस्ट किया गया
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